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हठप्रदीपिका ज्योत्सना (आलोचनात्मक संस्करण) - Huthapradipika Jyotsana

हठप्रदीपिका ज्योत्सना (आलोचनात्मक संस्करण) - Huthapradipika Jyotsana

$29.00
  • SKU: HAA135
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  • Publishers: Kaivalyadhama Samiti Lonavla
  • Barcode:
Description

Specifications:

  • Dimensions:8.0 inch X 5.5 inch
  • Edition:2009
  • Author:स्वामी महेशानन्द: (Swami Maheshananda)
  • Publisher:Kaivalyadhama Samiti Lonavla
  • ISBN:818948513x
  • Cover Type:Paperback
  • Number of Pages:444
  • प्राक्कथन

     

    हमारेसुधी पाठक इस तथ्यसे भली भाँति परिचितहै कि संस्कृतभाषा में निबद्धयोग से सम्बन्धितग्रन्थों की विषयवस्तु को समझने,उसे सरल एवं सुबोधबनाने तथा आधुनिकजीवन की समस्याओंके परिप्रेक्ष्यमें उसकी उपयोगिताको जनसामान्य तकले जाने में कैवल्यधानके दार्शनिक साहित्यानुसन्धानविभाग का अपनायोगदान रहा है।इस प्रक्रिया मेंयोग्य के अन्यान्यग्रन्थों के साथसाथ स्वात्मारामसूरिकृत हठप्रदीपिका,जो हठयोग की अभ्यासपुस्तिका के रूपमें स्वीकृत हैं,का आलोचनात्मकसंस्करण 1970 में अंग्रेजीअनुवाद के साथतथा 1980 में हिन्दीअनुवाद में हिन्दीअनुवाद के साथप्रकाशित कियाजा चुका है। हमारेद्वारा प्रकाशितइन दोनों संस्करणोंमें इस ग्रन्थकी विषयवस्तु को'समझने में; सम्पादकोंने प्रत्यक्ष अथवाअप्रत्यक्ष रूपसे ब्रह्मानन्दद्वारा रचित ज्योत्स्नाटीका को अपना आधारबनाया है । अत: ज्योत्सनाटीका की महत्तातथा इस महत्त्वपूर्णटीका के आलोचनात्मकसंस्करण की अनुपलब्धिको ध्यान में रखतेहुए विभाग ने इसटीका के आलोचनात्मकसंस्करण की योजनाबनाई । तदनुसारईश्वरीय अनुकम्पाके फलस्वरूप इसेपाठकों के सम्मुखरखने में हम सफलहो पाये हैं । हमेंआशा ही नहीं, पूर्णविश्वास है किहमारे हिन्दीभाषीसुधी पाठक अभ्यासपरकटीका के इस संस्करणसे लाभान्वित होंगे। इस संस्करण कोआप तक पहुँचानेका सम्पूर्ण श्रेयइस विभाग के विभागाध्यक्षडा. बाबूराम शर्मातथा उनके सहयोगीअनुसन्धान अधिकारीश्री. ज्ञान शंकरसहाय तथा श्री.रविन्द्रनाथ बोधेको जाता है जिन्होंनेअपने अथक परिश्रमद्वारा अल्प समयमें इसे पूरा किया। अत: वे हमारी बधाईके पात्र हैं।

    इस आलोचनात्मकसंस्करण के निर्माणरूपीमहायज्ञ में अनेकलोगों ने अपनेसहयोग की आहुतियांदी है जिन्हेंस्मरण करना तथाउनके प्रति अपनीकृतज्ञता ज्ञापितकरना हम अपना कर्तव्यसमझते हैं । इसश्रृंखला में,सर्वप्रथम हम उनसमस्त पुस्तकालयोंका धन्यवाद ज्ञापितकरते हैं जिन्होंनेइस टीका के हस्तलेखोंकी छाया प्रतियांहमें उपलब्ध करवायीहैं जिनका विवरणप्रस्तावना मेंयथास्थान दियागया है । इसी कममें हम श्री औदुम्बरक्षेत्रान्तर्गतश्रीब्रह्मानन्दमठ के वर्तमानमठाधीश प.पू. स्वामीपूर्णानन्दजीतथा पद्मश्री सेविभूषित कवि सुधांशुजी(श्री. हन. जोशी) केप्रति हम अपनाआभार प्रकट करतेहैं जिन्होंनेज्योत्स्नाकारब्रह्मानन्द केजीवन चरित के सम्बन्धमें हमें समय दियातथा सम्बन्धितजानकारी उपलब्धकरवायी । इस श्रीपावनक्षेत्रऔदुम्बर तक पहुँचनेमें डा. दत्तात्रेयवझे तथा उनके सम्बन्धीश्रीमती व श्रीअवनीश पारसनीसने हमारी सहायताकी, जिसके लिए हमउनके प्रति हद्याआभारी है ।

    मैं विशेषरूपसे हमारे अनुसन्धानकर्त्ताओंके प्रेरणास्रोत,वर्तमान समय केसाक्षात् कर्मयोगी,कैवल्यधाम के सचिवश्री ओम् प्रकाशतिवारीजी के प्रतिअपना आभार प्रकटकरता हूँ जिन्होंनेचतुर्थ अन्तर्राष्ट्रीयसम्मेलन की शुभबेला पर इस पुस्तकके उद्घाटन केप्रस्ताव द्वारान केवल विभाग काउत्साहवर्धन कियाअपितु पुस्तक निर्माणकार्य में शीघ्रतालाने की प्रेरणाभी दी । साथ ही पुस्तकप्रकाशन हेतु आवश्यकधनराशि का प्रबन्धकिया जिस के अभावमें पुस्तक काप्रकाशन ही सम्भवन हो पाता । हम कैवल्यधामके प्रशासनिक अधिकारीश्री सुबोध तिवारीका हृदय से आभारप्रकट करते हैंजिन्होंने पुस्तकमें दिये गये आसनोंके चित्रों कोप्रस्तुत करनेमें हमारा सहयोगदिया है । हम कैवल्यधामसमिति के कार्यालयकी अधीक्षिका श्रीमतीपुष्पा मांडकेजीका आभार प्रकटकरते हैं जिन्होंनेसम्पादक मण्डलएवं मुद्रक केबीच सेतु का कार्यतत्परतापूवक निभायाहै । कैवल्यधामपुस्तकालय के श्रीबण्डू कुटे तथाश्रीमती अर्चनासिन्हा के हम आभारीहैं जिन्होंनेइस संस्करण हेतुआवश्यक सामग्रीउपलब्धकरवा कर हमारासहयोग किया । इसग्रन्थ के संगणकीयटंकण का कार्यसुश्री शबाना कान्ट्रेक्टर,श्रीमती नाझिमासौदागर तथा विशेषरूपसे श्री पद्माकरराऊतजी ने बड़ीही तत्परता एवंकुशलता से पूराकरने में हमारासहयोग दिया जिसकेलिये हम इन सभीके प्रति अपनाआभार प्रकट करतेहैं। इस आलोचनात्मकसंस्करण के निर्माणमें कैवल्यधामके सभी आश्रम बन्धुओंका हृदय से आभारप्रकट करते हैंजिन्होंने प्रत्यक्षा/अप्रत्यक्षरूप से अपना अमूल्यसहयोग दिया । हम'एस् एन्टरप्राइजेस्के संचालक श्रीतनपुरेजी का हृदयसे आभार प्रकटकरते हैं जिन्होंनेकुशलतापूर्वकअल्पसमय में इससंस्करण को मुद्रितकरने का कार्यसम्पत्र किया ।अन्तमें, अपनेसुधी पाठकों सेनिवेदन करना चाहेंगेकि वे इस प्रकाशनमें रह गई हमारीत्रुटियों को उसीप्रकार स्वीकारकरेंगे जिस प्रकारस्वयं ज्योत्स्नाकारयति ब्रह्मानन्दने निम्न श्लोकद्वारा अपने पाठकोंसे निवेदन कियाहै—

     

    विषय सूची

    प्राक्कथन

    प्रस्तावना

    1 51

    ग्रन्थ विषय वस्तु प्रथम से चतुर्थ उपदेश

    1 392

    परिशिष्ट 1

    कैवल्यधाम द्वारा प्रकाशित हठप्रदीपिका से

    393 395

    पञ्चम उपदेश

    परिशिष्ट 2

    396 408

    श्लोकार्ध सूची

    परिशिष्ट 3

    हठप्रदीपिका ज्योत्सना शब्द सूची

    409 417

    परिशिष्ट 4

    चित्र सूची

     

     

     

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